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एक क्षण के लिए आप अपने भाई या मित्र के साथ बड़े होने की कल्पना करें। आप एक साथ खेले, एक साथ पढ़े और एक साथ वयस्क हुए। आपके जीवन के अधिकांश समय यह व्यक्ति आपके साथ रहा, और फिर एक दिन आपका यह मित्र या भाई परमेश्वर का "चुना हुआ" जन होने का दावा करता है। वास्तव में, यीशु के भाई याकूब के लिए यह कोई काल्पनिक दृश्य नहीं था। अपनी युवावस्था में उसे यीशु के उद्धारकर्ता होने पर संदेह था। परंतु अपने जीवन के बाद के वर्षों में वह न केवल यीशु का अनुयायी बना बल्कि यरूशलेम की कलीसिया का अगुवा बन गया और नए नियम की एक पुस्तक लिखी जो उसके नाम पर है।
यह याकूब की पत्री पर आधारित हमारी श्रृंखला का पहला अध्याय है, और हमने इसका शीर्षक "याकूब की पत्री का परिचय" दिया है। इस अध्याय में हम कुछ ऐसे परिचयात्मक विषयों का अध्ययन करेंगे जो हमें नए नियम के इस भाग की विश्वासयोग्य व्याख्या करने में सक्षम बनाएगा।
हम दो रूपों में "याकूब की पत्री के परिचय" को देखेंगे। पहला, हम इस पुस्तक की पृष्ठभूमि की खोज करेंगे। और दूसरा, हम इसकी सरंचना और विषय-वस्तु की जाँच करेंगे। आइए याकूब की पत्री की पृष्ठभूमि के साथ आरंभ करें।
बाइबल की किसी भी पुस्तक के बारे में कहें तो उसके लेखन के संदर्भ को अधिक से अधिक समझ लेना महत्वपूर्ण होता है। बाइबल की विभिन्न पुस्तकें लोगों द्वारा विशेष उद्देश्यों और सरोकारों के साथ वास्तविक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में लिखी गई थीं। अतः पृष्ठभूमि के ऐसे विषयों का अध्ययन करना हमें उन पुस्तकों को समझने में हमारी सहायता कर सकता है। जब हम याकूब की पत्री की प्रेरणाओं और पृष्ठभूमियों पर ध्यान देते हैं, तो हम यह समझने के लिए अधिक तैयार हो जाएँगे कि इस पत्री का क्या अर्थ था जब इसे लिखा गया था। और हम याकूब के वचनों को हमारे वर्तमान जीवनों में अधिक प्रभावशाली तरीके से लागू कर सकेंगे।
याकूब की पत्री की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हम पहले पुस्तक के लेखक पर ध्यान देंगे। इसके बाद हम मूल पाठकों को देखेंगे। और अंततः हम उस अवसर की जाँच करेंगे जिसमें याकूब की पत्री लिखी गई थी। आइए याकूब की पत्री के लेखक से आरंभ करें।
यद्यपि हम जानते हैं कि पवित्रशास्त्र पवित्र आत्मा की प्रेरणा से रचा गया है, परंतु फिर भी याकूब की पत्री के समान बाइबल की बहुत सी पुस्तकें अपने मानवीय लेखकों को भी दर्शाती हैं। और जितना अधिक हम बाइबल की पुस्तकों के लेखकों के बारे में जानते हैं, उतना अधिक हम उनके संदेश को समझने और उसकी व्याख्या करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसीलिए हमें इस विषय में जितना अधिक हो सीखना चाहिए कि याकूब की पत्री किसने लिखी थी।
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